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कर अलविदा छोर गए दुनिया नहीं रहे अब जिन्दा एन डी तिवारी
[Edited By: Naina shandilya ]
10/19/2018 12:48:53 PM






18 अक्टूबर गुरुवार को  दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे एनडी तिवारी ने जन्मदिन के दिन ही अंतिम सांस ली. एन डी तिवारी अपने दौर में बेहद लोकप्रिय नेता थे. उन्होंने कभी समझौते की राजनीति नहीं की. एक बार तो उन्होंने कांग्रेस से भी नाता तोड़ लिया था और अपनी पार्टी खड़ी कर दी थी. हालांकि राजनीति के आखिरी दिनों में विवाद से भी उनका नाम जुड़ा.एन डी तिवारी का जन्म नैनीताल के बलौटी गांव में 18 अक्टूबर 1925 को हुआ था. शुरुआती पढ़ाई के बाद वे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी गए, जहां से उन्होंने राजनीति शास्त्र में एमए और फिर एलएलबी की.एन डी तिवारी अपने सफल राजनीतिक जीवन में राज्यसभा, लोकसभा सांसद रहने के साथ-साथ तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री और एक बार आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रहे|

एन डी तिवारी का लंबा राजनीतिक इतिहास रहा. स्वतंत्रता संग्राम के वक्त तिवारी ने भी आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया था. 1942 में वे जेल भी गए थे, खास बात यह थी कि वे नैनीताल जेल में बंद थे, जहां उनके पिता पूर्णानंद तिवारी पहले से ही बंद थे. 
एन डी तिवारी साल 1952 में पहली बार नैनीताल से विधायक बने. उन्होंने प्रजा समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की. साल 1957 में एक बार फिर नैनीताल से चुनाव जीते और विधानसभा में विपक्ष के नेता बने. साल 1963 में वह कांग्रेस से जुड़े और साल 1965 में काशीपुर से विधायक बने.
इतना ही नहीं एन डी तिवारी ने 1976-77, 1984-85 और 1988-89 तक तीन बार गद्दी संभाली थी. इसके बाद 2002 से 2007 तक उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था.