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कुछ ऐसे भी जगह जहाँ पर राम के जगह माना जाता है रावण को भगवान
[Edited By: Naina shandilya ]
10/19/2018 5:39:55 PM






करने बुराई का नाश जगाने दिलों में अच्छाई का एहसास प्रेम और सत्य की राह दिखाता  हैं दशहरे का त्योहार | बुराई पर अच्छाई के जीत के जश्न में आज सारा शहर डूबा हुआ है गली-नुक्कड़ और बड़े-बड़े मैदानों में रावण (Ravana) का पुतला जलाया जाएगा. बुराई पर अच्छाई की जीत का ये जश्न  एक दूसरे के साथ खुशियाँ बाँट  रहा है तो वही दूसरी तरफ एक ऐसा भी गांव है जहाँ आज जश्न के जगह मातम मनाया जा रहा है मैदानों में मेले लगेंगे और मेले में राम और रावण से जुड़े खेल-खिलौने दिखेंगे. एक तरफ परिवार मिलकर चाट खाते हुए रावण वध देखेगा, वहीं, दूसरी ओर कई जगहों पर रावण के इस मृत्यु दिन पर शोक मनाया जाएगा. जी हां, भारत में ऐसे ये 6 मंदिर हैं जहां राम नहीं रावण की पूजा की जाती है. इसके अलावा घर के बड़े बच्चों को विजयदशमी का महत्व समझाते हुए नज़र आते है  |
माना जाता है  कि भगवान श्री राम (Sri Ram) ने दशमी के दिन 10 सिर वाले अधर्मी रावण (Ravana) को मार गिराया था. यही नहीं इसी दिन मां दुर्गा (Maa Durga) ने महिषासुर नाम के दानव का वध कर उसके आतंक से देवताओं को मुक्‍त किया था. नवरात्रि (Navratri) के नौ दिनों के बाद 10वें दिन नौ शक्तियों के विजय के उत्‍सव के रूप में विजयदशमी मनाई जाती है.
शरद नवरात्र के 10वें दिन और दीपावली से ठीक 20 दिन पहले दशहरा आता है. हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी या दशहरे का त्‍योहार मनाया जाता है. दशहरा का विजय मुहूर्त सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है. मान्‍यता है कि शत्रु पर विजय प्राप्‍त करने के लिए इसी समय निकलना चाहिए. विजय मुहूर्त में गाड़ी, इलेक्‍ट्रॉनिक सामान, आभूषण और वस्‍त्र खरीदना शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस मुहूर्त में कोई भी नया काम किया जाए तो सफलता अवश्‍य मिलती है. इस दिन शस्‍त्र पूजा के साथ ही शमी के पेड़ की पूजा की जाती है. साथ ही रावण दहन के बादथोड़ी सी राख को घर में रखना शुभ माना जाता है.

एक दूसरी कथा के मुताबिक भगवान श्री राम ने लगातार नौ दिनों तक लंका में रहकर रावण से युद्ध किया. फिर 10वें दिन उन्‍होंने रावण की नाभ‍ि में तीर मारकर उसका वध कर दिया था. कहते हैं कि भगवान श्री राम ने मां दूर्गा की पूजा कर शक्ति का आह्वान किया था. श्री राम की परीक्षा लेते हुए मां दुर्गा ने पूजा के लिए रखे गए कमल के फूलों में से एक फूल को गायब कर दिया. राम को कमल नयन कहा जाता था इसलिए उन्होंने अपना एक नेत्र मां को अर्पण करने का निर्णय लिया. ज्यों ही वह अपना नेत्र निकालने लगे देवी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुईं और विजयी होने का वरदान दिया. फिर दशमी के दिन श्री राम ने रावण का वध कर दिया. 
 मैसूर और कुल्‍लू का दशहरा तो दुनिया भर में मशहूर है. नवरात्रि के नौ दिनों बाद 10वें दिन देश के अलग-अलग कोनों में रावण दहन और मेलों का आयोजन होता है. इस दिन रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. दशमी के दिन दुर्गा पंडालों पर विशेष पूजा होती है. 
कर्नाटक के मैसूर का दशहरा सिर्फ भारत में नहीं बल्‍कि पूरी दुनिया में मशहूर है. 10 दिनों तक मनाया जाने वाला मैसूर का दशहरा उत्‍सव देवी दुर्गा के स्‍वरूप चामुंडेश्‍वरी द्वारा महिषासुर के वध का प्रतीक है. मैसूर में दशहरा मनाए जाने की परंपरा 600 सालों से भी ज्‍यादा पुरानी है| 10वें दिन के उत्‍सव को जम्‍बू सवारी या अम्‍बराज कहा जाता है. इस दिन 'बलराम' नाम के हाथी और अन्‍य 11 गजराज को विशेष रूप से सजाया जाता है. बलराम के सुनहरे हौदे पर सवार होकर मां चामुंडेश्वरी नगर भ्रमण के लिए निकलती हैं. इस 750 किलो वजन के हौदे की खासियत यह है कि इसमें लगभग 80 किलो सोना लगा हुआ है. हौदे पर बेहद खूबसूरत नक्‍काशी की गई है. आपको बता दें कि साल में एक ही बार मां चामुंडेश्वरी की प्रतिमा नगर भ्रमण के लिए निकलती है. 
रावण बहुत बड़े विद्वान थे. वह शिव जी के बहुत बड़े भक्त थे. इसी वजह से भारत में कई जगहों पर उनके नाम के मंदिर हैं जहां रावण को भगवान मानते हैं. ऐसे ही छह मंदिरों के बारे में जहां रावण की पूजा की जाती  है  यहां पर रावण ने भगवान शिव की वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. साथ ही यह भी माना जाता है कि बैजनाथ कस्बे से होकर ही रावण शिवलिंग लेकर लंका के लिए गुज़रे थे. यहां कोई रावण का मंदिर नहीं है, बल्कि कस्बे के साथ मौजूद यह मंदिर टूरिस्टों को अपनी तरफ आकर्षित करता है. यहां रावण के पुतले नहीं जलाए जाते.
 कानपुर के शिवाला क्षेत्र में मौजूद है दशानन मंदिर. साल में सिर्फ एक ही बार दशहरा के दौरान इस मंदिर के द्वार खोले जाते हैं. मंदिर में मौजूद रावण की मूर्ति का श्रृंगार कर आरती उतारी जाती है. सिर्फ इसी एक दिन भक्तों को मंदिर में आने की अनुमति होती है. भारी भीड़ में यहां लोग रावण के दर्शन के लिए आते हैं. लोगों की मान्यता है कि 1890 में बने इस मंदिर में तेल के दिए जलाने से मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. 
मंडोर,जोधपुर और राजस्थान को रावण  का ससुराल माना जाता है. यहां रावण की पहली पत्नी मंदोदरी को बेटी मानते हैं. इसके अलावा यहां मौजूद श्रीमाली ब्राह्मण समाज के लोग रावण की कुलदेवी खरानना की पूजा करते हैं और खुद को रावण का वंशज बताते हैं. मंडोर में रावण और मंदोदरी का मंदिर भी है. दशहरे के दिन रावण की मृत्यु और मंदोदरी के विधवा होने की वजह से यहां के लोग विजय दशमी के दिन शोक मनाते हैं. 
विदिशा, मध्य प्रदेश इस जगह को भी मंदोदरी का जन्म स्थान मानते हैं. दशहरे के दिन लोग यहां मौजूद 10 फीट लंबी रावण की प्रतिमा की पूजा करते हैं. इसके साथ ही शादियों जैसे शुभ अवसर पर भी इस मूर्ति का आर्शीवाद लेते हैं. 
मंदसौर, मध्य प्रदेश विदिशा की ही तरह मंदसौर में भी रावण की पूजा की जाती है. इस जगह मौजूद मंदिर को मध्य प्रदेश में बना रावण का पहला मंदिर माना जाता है. यहां रावण रुण्डी नाम से रावण की विशाल मूर्ति भी मौजूद है, जिसकी पूजा की जाती है. महिलाएं इस मूर्ति से सामने से घूंघट करके निकलती हैं. मान्यताओं के अनुसार रावण को मंदसौर का दामाद माना जाता है. मंदोदरी के नाम पर ही इस जगह का नाम मंदसौर पड़ा, 
 लंकेश्वर महोत्सव (फसल महोत्सव), कोलार, कर्नाटक
यहां लंकेश्वर महोत्सव के दौरान रावण की पूजा के साथ-साथ जुलूस भी निकाला जाता है. जुलूस में रावण के साथ भगवान शिव की मूर्ति को भी घुमाया जाता है. मान्यता है कि रावण के भगवान शिव का परम भक्त होने के चलते यहां रावण की पूजा की जाती है. कोलार के लिए मंडया जिले में मालवल्ली तहसील में रावण  का एक मंदिर भी है.